Thursday, April 24, 2014

कब शान्ति की सा“स लेगा मधेश

कैलास दास
मधेश आन्दोलन से मधेश की चर्चा राष्ट्रीय-अन्तर्रर्ाा्रीय स्तर पर होने लगी है, चाहे वह अधिकार के वास्ते हो या आपसी आन्तरिक द्वन्द्व । होना भी स्वाभाविक है । नेपाल की सबसे ज्यादा आबादी और क्षेत्रफल मधेश में है । परन्तु एकलौते शासन के कारण मधेश में रहने वाले मधेशी समुदाय दो सौ पचास वर्षसे शोषित, पीडिÞत और उपेक्षित रहा है । यहाँ तक की मधेश राजनीतिक, भौतिक, एवं मानसिक विकास उर्वर भूमि बनी रही, फिर भी यहाँ की जनता में कोई सुधार देखने को नहीं मिलता ।

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२०६२/०६३ के जनआन्दोलन पश्चात् मधेश आन्दोलन हुआ और इसके पश्चात् अन्तर्रर्ाा्रीय स्तर पर मधेश ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर्राई विश्व ने यह जाना कि नेपाल में मधेश भी एक विशेष क्षेत्र है । इस आन्दोलन से दो प्रकार कीे राजनीतिक स्थिति उत्पन्न हर्ुइ । एक सडÞक राजनीति और दूसरी भूमिगत । जिसने राष्ट्रीय मुद्दा का रूप ले लिया । सडÞक पर राजनीति करने वालो ने मधेश में बन्द, हडÞताल, नारा-जुलुस लगाकर अपनी उँचाई बढर्Þाई तो भूमिगत समूहों ने अपने ही भाई बन्धुओं की हत्या, अपहरण, फिरौती के द्वारा त्रास फैलाया । जबकि दोनो का एक ही लक्ष्य था ‘मधेश मुक्ति’ ।
अगर मधेशी में राजनीतिक परिपक्वता होती तो अवसर का विशेष फायदा अवश्य उठाया होता । २०६४ के संविधान सभा चुनाव में नेपाल कीे राजनीति में मधेशी दल का चौथा स्थान था । उस समय भी मधेश की राजनीति खूब चर्चे में रही । यहाँ हरेक जिला में नेताओं को हरियाली देखने को मिले । यह हरियाली देखकर मधेशी जनता शायद सबसे ज्यादा खुश हर्ुइ थी  । उन्हें लगा कि अब अपना राशन, अपना शासन और अपनी व्यवस्था होगी । किन्तु किसानों का नेता वही रहा, जो मधेश को हमेशा हीनभाव से देखा करता था । ऐसे में भला कैसे यह हरियाली ज्यादा दिन तक टिक सकती थी । एक मुद्दा, एक नारा और एक आवाज जो मधेश को सशक्त और प्रौढ बना सकता था, वह स्थाई नहीं हो सका और ‘फूट डालो, शासन करो’ ने ऐसा जाल बिछा दिया कि मधेश फिर से चर्चा में आ गया । तीन दल, दो दर्जन से ज्यादा दल में विभाजित होकर शक्तिहीन हो गए । जिसका परिणाम २०७० के संविधान सभा चुनाव में स्पष्ट देखने को मिला । फिलहाल  मधेशी दल की स्थिति इस मुहाबरे की तरह हो गई है ‘घर का ना घाट का’ । मधेश मुक्ति की लडर्Þाई तभी सफल होती जब संविधान सभा में बहुमत से जीतकर संविधान निर्माण मंे मधेश का अधिकार सुनिश्चित करवा पाता । परन्तु अपने ही कुकृत्य के कारण इस बार न सरकार में है और न ही संविधान निर्माण मंे किसी की स्थिति मजबूत है ।
दूसरी ओर भूमिगत होकर मधेश मुक्ति के नाम पर लडÞ रहे समूहों ने भी मधेश को कभी शान्ति की साँस नही लेने दिया । उसकी भी कथनी और करनी हाथी के दाँत की तरह रही । वह भी राजनीतिक गतिविधि अनुसार आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक, साँस्कृतिक भाषिक और राष्ट्रीय पहचान की लडर्Þाई लडÞे होते तो आज जिस प्रकार से प्रशासन द्वारा गिरफ्तार कर दोषी करार दिया जा रहा है वह नतीजा देखने को नही मिलता । तर्राई के जिलों में जितनी भी हत्या, हिंसा, अपहरण, फिरौती, धाक-धमकी की पीडÞा मधेशी समुदाय को सहना पडÞा यह इन्हीं लोगों ने किया है यह तो नही कहा जा सकता, परन्तु यह सत्य है कि सभी की जिम्मेवारी इन्ही लोगों ने ली है ।
मधेश मुक्ति की लडर्Þाई सशस्त्र भूमिगत समूहों ने जिस प्रकार से प्रारम्भ किया, उनमें तर्राई के आठ जिले सबसे ज्यादा आतंकित रहे । जबकि सभी जानते है कि इन्ही आठ जिले से राजनीति की शुरुआत होती है और यही पतन भी करवा देती है । इतिहास गवाह है कि काँग्रेस, एमाले की राजनीतिक भूमि मधेश का जिला रहा और इसने राणा शासन को खत्म कर दिया । एमाओवादी की राजनीतिक यात्रा एवं जनयुद्ध ने राजतन्त्र का अन्त कर दिया । इसने मधेश ने भी साथ दिया । परन्तु अपनी भूमि के अधिकार के वास्ते जो दो प्रकार के राजनीतिक आन्दोलन हुए, आज अधिकार पाने से पहले परास्त हो चुके हैं ऐसा महसूस हो रहा है ।
वि.स. २००७ साल २०४६ और २०६२/०६३ के आन्दोलन पश्चात् भी मधेश भूमि को शान्ति की साँस नहीं मिली । मधेश आन्दोलन ने रमेश महतो की हत्या पश्चात् उग्र रुप लिया, जिसका नेतृत्व मधेशी जनअधिकार फोरम नेपाल के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने किया था और जो मधेश की शक्ति के रूप में आगे आये । परन्तु उन्होंने ने भी महतो हत्यारा को मन्त्री परिषद् द्वारा तैयार किए गए रिहाई के कागजात पर हस्ताक्षर कर मधेश मुद्दा को गुमराह कर दिया ।
जनता और देश के लिए जो राजनीतिक लडर्Þाई होती है वह कभी खत्म और अपराध के दायरे में नहीं आती है । मधेश में जितनी भी हत्या हिंसा हर्ुइ है, यह सभी भूमिगत समूह ने किया होगा, ऐसा नहीं है । ऐसा भी हो सकता है कि मधेश के मुद्दा को समाप्त करने के लिए यह चाल चली गई हो । लेकिन जिस प्रकार से मधेश मुक्ति की लडर्Þाई को बदनाम करने के लिए सशस्त्र समूह ने जिम्मेवारी लिया है, वह अवश्य ही अपराध है ।
बहुत अफसोस की बात है कि मधेशी जनता से सहयोग लेकर, मधेश भूमि का प्रयोग कर, मधेशी नेता को आगे लाकर आज मधेश मुद्दा समाप्त कर दिया गया है । मधेश मुक्ति के नाम पर ४८ सशस्त्र भूमिगत समूह हैं, जिन्होंने मधेशी जनता को आतंक के सिवा कुछ नही दिया है । अगर्रर् इमानदारी पर्ूवक मधेश मुक्ति की लडर्Þाई लडेÞ होते तो अभी जिस प्रकार से राज्य पक्ष द्वारा गिरफ्तारी का अभियान चलाया गया है वह दिन नहीं आता । स्वार्थ एवं पैसा के लालच में उन सभी ने जनता को इस प्रकार आतंकित बना दिया कि पुलिस के इस अभियान से जनता प्रफुल्लित हो रही है ।
कब किससे वार्ता हर्ुइ -
मधेश मुक्ति की लडर्Þाई में यहाँ पर जितने जिला हैं, उससे ज्यादा भूमिगत समूह हैं । सरकारी तथ्यांक के अनुसार ४८ समूह ने विभिन्न अपराधों में घटना की जिम्मेवारी ली है । इन सभी से हत्या हिंसा छोडÞने के लिए नेपाल सरकार द्वारा गठित सरकारी वार्ता टोली ने करीब ४५ भूमिगत समूह के साथ वार्ता किया, ऐसा मन्त्रालय के वेवसाइट मंे उल्लेख है ।
२६ मार्गशर्ीष्ा २०६५ में मधेसी भाइरस किलर्स, ११ पौष २०६५ में संयुक्त जनतान्त्रिक तर्राई मुक्ति मोर्चा, १८ कार्तिक २०६८ में संयुक्त जनतान्त्रिक तर्राई मुक्ति मोर्चा संस्थापन पक्ष, ८ मार्गशर्ीष्ा २०६८ में संयुक्त जनतान्त्रिक तर्राई मुक्ति मोर्चा कौटिल्य शर्मा समूह, १६ पौष २०६५ में तर्राई संयुक्त जनक्रान्ति पार्र्टर्ी, २६ पौष २०६५ में जनतान्त्रिक तर्राई मुक्ति मोर्चा राजन मुक्ति समूह, १० फागुन २०६५ में लिवरेशन टाइगर अफ तर्राई इलम -एलटीटीइ), ७ चैत्र २०६५ में मधेस मुक्ति टार्इगर्स, २४ बैशाख २०६७ में अखिल तर्राई मुक्ति मोर्चा संस्थापन पक्ष, १६ पौष २०६८ में संयुक्त जनतान्त्रिक तर्राई मुक्ति मोर्चा -पवन समूह), २८ पौष २०६८ में संयुक्त जनतान्त्रिक तर्राई मुक्ति मोर्चा -आजाद समूह), ७ माघ २०६८ में अखिल तर्राई मुक्ति मोर्चा -जयकृष्ण गोइत समूह), १३ माघ २०६८ में जनतान्त्रिक तर्राई मुक्ति मोर्चा -भगत सिंह समूह), २१ फागुन २०६८ में जनतान्त्रिक मधेस तर्राई मुक्ति मोर्चा -झबर साह, प्रताप समूह) और ६ बैशाख २०६९ में संयुक्त क्रान्तिकारी तर्राई मधेस मुक्ति मोर्चा के साथ वार्ता की गई ।
क्या थी शतर्ें -
विभिन्न चरण में हर्ुइ वार्ता में कहीं भी मधेश मुक्ति की बात नहीं देखी गई है । शर्त थी वार्ता अवधि तक सशस्त्र समूह का वार्ता टोली के सदस्यों की सुरक्षा नेपाल सरकार करेगी, सशस्त्र समूहों की सशस्त्र कारवाही स्थगित हो, नेपाल सरकार की ओर से उस समूह के नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के साथ राजनीतिज्ञ के रूप में व्यवहार, जेल में रहे और आरोप लगाए गए कार्यकर्ताओं कीे नामावली नेपाल सरकार को उपलब्ध करा कर उन्हें अनुसन्धान के बाद रिहा कर दिया जाए, स्वतन्त्र एवं शान्तिपर्ूण्ा रूप में राजनीतिक सभा, जुलूस, रैली, गोष्ठी, सेमीनार तथा राष्ट्र निर्माण का कार्यक्रम, सम्बन्धित जिला प्रशासन कार्यालय के साथ समन्वय कर संचालन किया जाए, मुल्क में शान्ति स्थापना के लिए अन्य द्वन्द्वरत राजनीतिक समूहों को भी वार्ता के टेवल में लाकर समझौता किया जाए ।
चार से पाँच तथ्यों पर दोनांे के बीच प्रथम चरण में सहमति हर्ुइ थी  । दूसरे चरण में उपलब्ध नामावली के अनुसार बन्दी कार्यकर्ता की रिहाई और आरोप वापस लेने की प्रक्रिया कानून तथा न्याय मन्त्रालय और गृह मन्त्रालय के समन्वय में एक महीने के भीतर शुरु किया जाए, सम्पर्ूण्ा हथियार २०६८ भाद्र १४ भीतर नेपाल सरकार को सौंपा जाए, २०६८ सावन २६ में मन्त्रालय में दिए गए विवरण अनुसार मोर्चा के आहृवान में हुए आन्दोलन के क्रम में शहीद हुए मृतकों की नामावली सम्बन्ध में यथार्थ छानबीन कर गृहमन्त्रालय में लिखकर दिया जाए, आन्दोलन के क्रम में घायल नेता कार्यकर्ता को उपचार खर्च उपलब्ध कराया जाए ।
पाँच सूत्रीय समझौता अखिल तर्राई मुक्ति मोर्चा संस्थापन पक्ष की तरफ से वार्ता टोली संयोजक विनोदकुमार चौधरी -विवेक) और सरकारी वार्ता टोली की संयोजक पम्फा भुसाल के बीच २३ सावन २०६८ में हुआ था ।  इसी प्रकार बहुत सारे समूहो के साथ दो तीन चरण तक सरकार और सशस्त्र समूह की वार्ता टोली के साथ समझौता हुआ ।
यक्ष प्रश्न यह है कि आखिर अब कौन मधेश का भाग्य निर्माता होगा – नेता आज भी अपनी स्वार्थपर्ूर्ति में लगे हुए हैं, परिवादवाद फलफूल रहा है, सशस्त्र समूह कलंकित हो चुके हैं इसके अलावे जो थे और जो हैं, उन्होंने मधेश का इस्तेमाल तो किया, पर जब देने का समय आया तो मधेश हमेशा की तरह हासिए पर था । तो आगे क्या – यह प्रश्न हर मधेशी जनता का है, उनकी आँखें उन्हें ढूँढÞ रही हैं जो उनका मसीहा बने न कि खुद का ।

किसने सबसे ज्यादा आतंक फैलाया -
खास कर तर्राई के कुछ जिलों को सबसे ज्यादा आतंकित करने वाला राजन मुक्ति कहलाने वाला रंजित झा, अर्जुन सिंह उर्फमुकेश चौधरी, पृथ्वी सिंह उर्फश्याम यादव, स्वामी जी कहलाने वाला उमेश यादव हंै । जिनके ऊपर बडेÞ-बडेÞ अभियोग लगे हंै । नेपाल की ही सबसे बडÞी घटना जनकपुर बम बिस्फोट की जिम्मेवारी इसी समूह ने लिया, जिनमंे पाँच की मौत और ३२ लोग घायल हुए थे । उसी प्रकार सञ्चार उद्यमी अरुण कुमार सिंघानिया की २०६६ साल में होली के दिन गोली मार कर हत्या कर दी गई थी । महिला पत्रकार उमा सिंह की निर्ममता पर्ूवक शरीर के विभिन्न भाग में धारदार हथियार प्रहार कर हत्या कर दी गई । महोत्तरी के सहायक जिला शिक्षा अधिकारी वकीलकुमार निरौला की गोली प्रहार कर हत्या की गई और टेलिफोन द्वारा उन्ही लोगों ने जिम्मेवारी ली थी । सशस्त्र समूह के नायक सहित पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर चुकी है । किसी को जाँचबूझ के लिए रखा गया है तो किसी को जेल तक चलान कर दिया गया है ।
सात वर्षतक ये सभी आधुनिक जीवन बिताने के लिए, ऐश आराम और मौज मस्ती का जीवन बिताने के उद्देश्य पर्ूर्ति के लिए गलत आदतों में पFmसकर अपराधिक क्रियाकलाप करते रहे । जबकि प्रारम्भिक काल में मधेशी जनता इन सभी पर गर्व करती थी कि मधेश मुक्ति के लिए इन सपूतों ने जन्म लिया है । जनता की आशा और विश्वास को जिस प्रकार से तोडÞा गया है वह बहुत ही घृणित है । राज्य के साथ अधिकार की लडर्Þाई लडÞने वालों ने अपने ही घर में हत्या हिंसा उत्पन्न कर इन्सानियत को शर्मिन्दा किया है ।

जनकपुर बम विस्फोट
वि.सं. २०६९ बैसाख १८ गते सोमवार को जो बम विस्फोट हुआ था, वह आजतक रहस्यमयी फिल्म की तरह रहस्य के आवरण में ही छुपा हुआ है । इस दुखद घटना में विमल शरण दास, महिला रंगकर्मी रञ्जु झा, झगरु दास, सुरेश उपाध्याय और दीपेन्द्र दास की  मौत हर्ुइ थी और करीब तीन दर्जन घायल हुए थे ।
किसी भी फिल्म में तीन पात्र प्रमुख होते हंै । नायक, खलनायक और नायिका जिससे दर्शको कीे जिज्ञासा बनती और बिखरती रहती है । बम बिस्फोट के इस रहस्यमयी फिल्म  में नायक और नायिका हंै ही नहीं । दो खलनायक पात्रों के बीच जनता दर्शक बनी है और उनकी जिज्ञासा बढÞता जा रही है । घटना उस समय की है जब नेपाली काँग्रेस, एमाले, एमाओवादी और मधेशवादी दल अपनी डफली अपना राग आलाप रहे थे और अलग अलग प्रदेशों की घोषणा कर रहे थे । उसी समय मिथिला राज्य कीे मांग करते हुए मिथिला राज्य संर्घष्ा समितिे सडÞक आन्दोलन कर रहे थे और धरने पर बैठे हुए थे ।
बिस्फोट के कुछ ही देर बाद जयप्रकाश चौधरी, सुरेश कर्ण्र्ााजितेन्द्र लाल कर्ण्र्ाारिपेन्द्र झा को गिरफ्तार कर लिया गया था । जनता में कोलहाल मचा था कि इस घटना में जिला विकास समिति के सह-लेखापाल जीवननाथ चौधरी तथा धनुषा क्षेत्र नं. ४ के सभासद एवं राज्य मन्त्री संजय कुमार साह की संलग्नता हो सकती है । उस समय माओवादी की सरकार थी । जनकपुर में फिर से आन्दोलन हुआ मृतकों को शहीद घोषित किया जाए यह माँग की गई और सरकार ने भी मृतकों के परिवार को दस-दस लाख रुपैया देकर आन्दोलन को शान्त कर दिया ।
घटना के ९ महीने बाद जनकपुर में फिर से बबाल मचा । घटना से सम्बन्धित एक सीडी बजार में आई जिसमें पर्ूव मन्त्री संजय कुमार साह और घटना की जिम्मेवारी लेने वाले मुकेश चौधरी की आवाज थी, जिसमें यह तय किया जा रहा था कि, बम कहा रखा जाए, कौन-कौन धरना में है आदि । इस सीडी के बाजार में आने के बाद मिथिला राज्य संर्घष्ा समिति ने प्रशासन पर दबाव देने के लिए फिर से आन्दोलन किया । उसी समय मधेश क्रान्ति फोरम जिसके संयोजक पर्ूव मन्त्री संजय साह थे उन्होने ने भी जि. वि. स. के सह-लेखापाल जीवनाथ चौधरी और मुकेश चौधरी के काल डिटेल्स र्सार्वजनिक किये गये जिसमें घटना के दिन दोनों के बीच बातचीत हर्ुइ थी यह स्पष्ट पता चलता  है । चौधरी और साह के बीच द्वन्द को देखकर फिर से मिथिला राज्य संर्घष्ा समिति पीछे हट गया ।
बम बिस्फोट घटना की जिम्मेवारी लिए अर्जुन सिंह उर्फमुकेश चौधरी जिन्होने मधेश मुक्ति की लडर्Þाई भूमिगत होकर लडÞ रहे थे उसे भी जिला प्रहरी कार्यालय धनुषा ने ०७० फागुन १८ गिरफ्तार कर लिया है । परन्तु बम बिस्फोट हादसा का योजनाकार कौन है अभी तक र्सार्वजनिक नही किया गया है ।
बिस्फोट की जिम्मेवारी लिए चौधरी क्या कहते हैं -
रामानन्द चौक बम बिस्फोट घटना की जिम्मेवारी लेने वाले मुकेश चौधरी को प्रहरी ने भारत के उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया, यह बात विभिन्न मिडिया में आने बाद भी जिला प्रशासन कार्यालय धनुषा यही दावा करती आई है कि, उन्हें जनकपुर के जटही से गिरफ्तार किया गया है । बम बिस्फोट के कुछ ही देर बाद उन्होने सञ्चारकर्मियों को फोन कर कहा था कि मधेश को खण्डित करने के लिए यह आन्दोलन किया जा रहा है, इसलिए हमारे पार्टर्ीीे मधेश को खण्डित करनेवालांे के विरोध में यह बिस्फोट कराया है ।
प्रहरी ने जब उन्हे गिरफ्तार किया तो उन्होने कहा कि जिला विकास समिति के सह लेखापाल जीवनाथ चौधरी ने यह बिस्फोट कराने के लिए कहा था । जब प्रहरी को चौधरी की बातों पर विश्वास नहीं हुआ तो उन्हांेने पोल्रि्राफ मशीन -झूठ पकडÞनेवाला मशीन) से जाँचने की बात की जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए ।
 क्या कहता है पोल्रि्राफ मशीन
जनकपुर के रामानन्द चौक में हुआ बम बिस्फोट नेपाल कीे सबसे बडÞी वारदात मानी जाती है । करीब दो वर्षपहले हुए इस बिस्फोट में पाँच की मौत और तीन दर्जन से ज्यादा घायल हुए थे । फिलहाल बिस्फोट करानेवाले अर्जुन सिंह उर्फमुकेश चौधरी अभी प्रहरी हिरासत में है । बिस्फोट का मुख्य योजनाकार कौन है प्रहरी अनुसन्धान में अभी तक स्पष्ट नही हुआ है । चौधरी के बयान पर प्रहरी को शंका हर्ुइ तो सीआईबी नेपाल के टोली ने पोल्रि्राफ मेशिन अर्थात झुठ पकडÞनेवाले मशीन से चौधरी को जाँचा ।
प्रहरी स्रोत के अनुसार चौधरी झूठ बोल रहा है । परन्तु मशीन यह नही कहता है कि इसका मुख्य योजनाकार कौन है । इस मशीन ने यह तो साबित कर दिया कि चौधरी झूठ बोल रहा है आगे का अनुसन्धान अभी तक जारी है ।
कौन है बम बिस्फोट का मुख्य योजनाकार
जनकपुर के रामानन्द चौक पर हुए बम बिस्फोट का मुख्य योजनाकार धनुषा क्षेत्र नं. ४ का सभासद् एवं सद्भावना पार्टर्ीीे वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय कुमार साह है ऐसा प्रहरी ने दावा किया है । धनुषा प्रहरी उपरीक्षक उत्तम राज सुवेदी के अनुसार अनुसन्धान के क्रम में गिरफ्तार किए गए मुकेश चौधरी और ओम प्रकाश यादव के बयान के आधार पर साह मुख्य अभियोगी है । उन्होने यह भी कहा है कि साह के गिरफ्तारी के लिए नेपाल के ७५ जिलों को प्रहरी प्रधान कार्यालय से र्सकुलर जारी कर दिया गया है ।
संजय साह निर्दोष है ः सद्भावना
जनकपुर बम बिस्फोट का मुख्य अभियोगी संजय कुमार साह है, ऐसा प्रहरी दावा कर रहीे है इधर सद्भावना पार्टर्ीीे ज्ञापन पत्र में साह बिलकुल निर्दोष है ऐसा उल्लेख किया जा रहा है । पार्टर्ीीे केन्द्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र महतो ने प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला को चैत्र ६ गते ज्ञापन पत्र देते हुए जनकपुर बम काण्ड का स्वतन्त्र तथा न्यायिक छानबीन की मांग भी की है । ज्ञापन पत्र में उन्होंने कहा है कि  माननीय सभासद संजय कुमार साह को फँसाया जा रहा है । बम बिस्फोट घटना के दो महीने बाद मृतक महन्थ विमल शरण का बेटा रामशरण ने पिता की हत्या मन्दिर के स्वामित्व को हडÞपने के लिए मोवाइल से फोन कर घटना स्थल पर बुलाकर हत्या करवाया गया, धनुषा जिल्ला प्रहरी कार्यालय ने इस मुद्दा का दर्ता नही किया यह बात भी ज्ञापन पत्र में उल्लेख है । प्रहरी के मुद्दा और अनुसन्धान में कहीं भी साह को प्रत्यक्ष रूप से इस  घटना में संलग्नता नहीं दिखाया गया है । ज्ञापन पत्र में निष्पक्ष, न्यायिक छानबीन हो,  छानबीन आयोग गठन कर वास्तविक दोषी पर कार्रवाई किया जाए उल्लेख है । संजय कुमार साह पार्टर्ीीे वरिष्ठ उपाध्यक्ष भी है ।

राजनीतिक एजेण्डा और क्रान्तिकारी नारा
देकर दिग्भ्रमित किया है ः पुलिस प्रमुख
धनुषा पुलिस प्रमुख उत्तम राज सुवेदी के अनुसार मधेश आन्दोलन पश्चात् सबसे ज्यादा फायदा सशस्त्र समूह ने लिया है । राजनीतिक एजेण्डा और क्रान्तिकारी नारा देकर जनता को दिग्भ्रमित किया गया है । पैसे के लिए अपहरण करना, फिरौती मांगना, बम बिस्फोट करना और कराना, धमकी देना यहाँ तक की हत्या तक कर देना इनका लक्ष्य था । समय अनुसार अलग-अलग तरीका अपनाकर इन समूहों ने आपराधिक क्रियाकलाप किया है । ऐसी भी कुछ घटनाएँ हैं, जिन्हंे समूह के नायक ने स्वयं किया है तो कुछ घटना किराए के आदमी से करवाया है । लेकिन सशस्त्र समूह के नायकों को पुलिस  गिरफ्तार कर चुकी है । उन्होने दावा करते हुए यह भी कहा है कि अपराधी क्रियाकलाप में संलग्न व्यक्ति नेपाल पुलिस की नजर से दूर नहीं रह सकते हैं । चाहे जो भी व्यक्ति होंगे उन्हे कभी नही छोडÞा जाएगा । उन्होंने कहा मधेश में सशस्त्र समूह का प्रभाव लगभग निस्तेज हो चुका है ।

Saturday, March 29, 2014

कमिटीद्वारा निर्देशक समिति सम्मानित

कैलास दास
जनकपुर । गणेश युवा कमिटीले हालै चयन गरेको वरिष्ठ निर्देशक, निर्देशक, कानूनी सल्लाहकार, अध्यक्षीय सल्लाहकार लगायतका व्यक्तिहरुलाई सम्मानित गरेका छन् ।
कमिटीका अध्यक्ष दीपक भगतको अध्यक्षतामा भएको सम्मान कार्यक्रममा बरिष्ठ निर्देशक गणेश चैतन्य ब्रम्हचारी, अध्यक्षीय सल्लाहकारमा शंकर साह, निर्देशक कैलास दास, श्याम प्रसाद साह, ललित साह, शुसान्त गुप्ता, दीपेन्द्र कुमार साह, शेषनारायण झा र कानूनी सल्लाहकार लोचन साहलाई फुलमाला र अबीर लगाएर सम्मानित गरेका छन् ।सम्मानित कार्यक्रममा वरिष्ठ निर्देशक गणेश चैतन्य ब्रम्हचारीले कमिटीलाई कसरी समाजिक, धार्मिक एवं खेलकुदको क्षेत्रमा अगाडि बढाउनु पर्दछ त्यसका बारेमा विशेष छलफल गरेका थिए । कार्यक्रममा महासचिव कैलास प्रसाद गुप्ताले कमिटीको अगामी कार्यक्रमका बारेमा प्रस्ताव राखेक थिए ।

गणेश युवा कमिटीद्वारा अञ्चल अस्पतालमा फलफुल वितरण

कैलास दास
जनकपुर । समाजिक एवं धार्मिक क्षेत्रमा सक्रिय भएर काम गर्दै आएका गणेश युवा कमिटीले साप्ताहिक कार्यक्रम अन्तर्गत शनिवार फलफुल वितरण गरिएको छ ।
कमिटीका अध्यक्ष दीपक भगतको अध्यक्षतामा एवं संजय साहको संयोजकत्वमा जनकपुर अञ्चल अस्पतालमा करीब दुई बिरामीहरुलाई फलफुल वितरण गरिएको छ । कार्यक्रमका प्रमुख अतिथि डा. जय कुमार मण्डलले जनकपुरको चौकचौकमा क्लिनिक भएपनि बिरामीहरुको मन जितेको अञ्चल अस्पताल नै हो । भारत लगायत नेपालका विभिन्न जिल्लाबाट निर्भिक भएर यहाँ उपचार गराउने गरेको उनले दावी गरे । अस्पतालमा दक्ष चिकित्सक हुनाले निष्पक्ष एवं निस्वार्थ रुपमा बिरामीहरुको उपचार हुने गरेको डा. मण्डलले जिकिर पनि गरे ।
त्यस्तै जनकपुर अञ्चल अस्पताल व्यवस्थापन समितिका अध्यक्ष कामेश्वर झाले गणेश युवा कमिटीले समाजिक क्षेत्रमा मात्र होइन स्वास्थ्य क्षेत्रमा पनि काम गर्दै आएकोप्रति धन्यवाद ज्ञापन गर्दै उनले एकत्रित भएर जनकपुरका सबै क्लवहरु सरसफाईको क्षेत्रमा काम गर्नका लागि आग्रह पनि गरे । अध्यक्ष झाले अस्पताल व्यवस्थापनमा आफूले कुनै कसर नछाडेको भन्दै अस्पताललाई अझै व्यवस्थित बनाउनका लागि दवाव दिन आवश्यक रहेको बताए ।
कमिटीका वरिष्ठ निर्देशक गणेश चैतन्य ब्राम्ह्मचार्यले राज्यले जनकपुरलाई अपेक्षित गरेपनि यहाँका क्लवहरुले नै विभिन्न क्षेत्रमा काम गरेर यहाँको गरिमालाई बचाउँदै आएको भन्दै गणेश युवा कमिटीले खास गरी धार्मिक एवं समाजिक क्षेत्रमा मात्र होइन स्वास्थ्य एवं खेलकुदमा काम गरेकोप्रति प्रशंसा व्यक्त गरे । उनले गत वर्ष पनि यो कमिटीले समाजिक क्षेत्रमा राम्रो काम गरेका र यस वर्ष पनि साप्ताहिक कार्यक्रम समाजिक क्षेत्रमा आफ्नो स्थान ओगेटेको कुरा औल्याए ।
कार्यक्रमका उद्घोषण पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र भण्डारीले गरेको थिए । कार्यक्रममा परिवार नियोजन संघका अध्यक्ष जितेन्द्र प्रसाद साहले पनि बोलेका थिए । त्यस्तै फलफुल वितरण कार्यक्रममा कमिटीका पूर्व अध्यक्ष, महासचिव, सचिव, निर्देशक, कानूनी सल्लाहकार, अध्यक्षीय सल्लाहकार, विद्यार्थी, युवाहरु लगायत सैकडौं व्यक्तिहरुको उपस्थिति रहेको थियो ।
अंचल अस्पतालमा रहेका दुई बेड मध्ये करीब एक भन्दा बढी विरामीहरुलाई सामाग्री वितरण गरिएको हो ।

Wednesday, March 26, 2014

होली


कैलास दास

हम सभ मिल के खेली होली
भैया ! हम सभ मिल के.......२
लाल—पिला आ हरा— गुलाबी
डालि के सभके कऽ देब रंग रंगोली
भैया ! हम सभ मिल के.......२

छिट—फुटि भऽ खेलली होली
खाली रहि गेल हमर झोली
आबहुँ नहि मिल के खेलाब होली
नहि भेटत अबिर नहि भेटत रंगक झोली
आऊ, भैया हम सभ........२

होली के महत्व नहि बुझली
अपने में सभ फुटिते गेली
रंगक रंग विरंग भऽ गेल
होली में हुरदंग भऽ गेल
तेँ हेतु आब,
सोचि समझि के खेली होली
भैया हम सभ........२

लाल—पिला आ हरा—गुलाबी
चारि रंगक ई होली
ककरा देह पर की फिट हएत
ओकरे सँ करु बलजोरी...२
भैया हम सभ........२

हमर रंग आ अहाँक होली
मिलजुलि खेलब सभ दिन कहली
मुदा होलीए में हुरदंग कऽ देली
बीच बाट में हम रहि गेली....२
आब नहि छोडब रंगक झोली
कतबो अहाँ करब बलजोरी
हम सभ खेलब होली
भैया हम सभ........२

दारु माउस हम छोडि देब
अधिकार नहि छोडब हम
एक बेर कएली अहाँ होली में हुरदंग
अब नहि पुगत अहाँक दम
मिल के चलब हम
भैया मिल के चलब हम...२
होली खेलब हम भैया ....२

Friday, March 21, 2014

जानकी मन्दिरः परम्परा और अस्तित्व का सवाल

कैलास दास:विश्व प्रसिद्ध जानकी मन्दिर के महन्थ की नियुक्ति को तोडÞने का प्रयास किया गया है, जिससे साधु सन्त, महन्थ, कुछ राजनीतिक दल, युवा क्लव आन्दोलित हैं । यह सदियों से चलती आ रही परम्परा को तोडÞने का बहुत बडा षड्यन्त्र है । न तो राज्य ने इसके लिए कोई नीति बनाई है और न ही राजनीतिक दल की सहमति है । फिर अचानक गुठी संस्थान केन्द्रीय कार्यालय काठमाण्डू से पत्र आना और उसमे जानकी मन्दिर के महन्थ पद पर जगदीश दास वैष्णव को नियुक्त करना चकित करने वाली बात अवश्य है ।  वि.स. २०५३ साल में जब मठिहानी के मान्महन्थ कौशल किशोर दास ने १६ हवें महन्थ के रुप में अपने शिष्य रामतपेश्वर दास को पगडÞी बाँध कर महन्थ
ramtapeshwar das
राजा लौटाओ अभियान में महन्थ रामतपेश्वर दास वैष्णव
बनाया था तभी से महन्थ बनने और बनाने की यही परम्परा अभी तक चलती आ रही है कि गुरु अपने ही किसी शिष्य को महन्थ पद पर नियुक्त करते हैं ।
किसी भी परम्परा को यही समाज बनाता है और परिवर्तन की जब आवश्यकता महसूस होती है तो इसका निर्ण्र्ााभी समाज ही करता है । जैसे जब तक राजतन्त्र रहा नेपाल हिन्दु देश कायम रहा । परन्तु राजतन्त्र के अन्त के बाद यह धर्मनिरपेक्ष देश बन गया । समयानुसार अगर परम्परा मे विकास नही होता तो परिवर्तन भी आवश्यक हो जाता है । लेकिन जानकी मन्दिर के महन्थ की नियुक्ति प्रक्रिया में आज तक जो गुरु शिष्य की परम्परा रही है, अचानक उस पर किसने हमला किया – क्या इस परम्परा को तोडÞने के लिए यहाँ का समाज राजी है, या किसी ने अपने अधीन में यह सब कराया है, यह प्रश्न सामान्य जनता के मन में है ।
वैसे तो जानकी मन्दिर के महन्थ रामतपेश्वर दास और मठिहानी मठ के मानमहन्थ जगरनाथ दास वैष्णव ने प्रेस कान्प|mेन्स में कहा कि, रत्नसागर मठ के महन्थ बैकुंठ दास भारतीय नागरिक है । उन्होंने अरबों रुपए की जमीन बिक्री की है । महोत्तरी शिक्षा कार्यालय के अधिकृत की हत्या कराने में भी उन्हीं का हाथ है, जैसा कि तर्राई जनतान्त्रिक पार्टर्ीीे अध्यक्ष राजमुक्ति ने पुलिस में बयान दिया है । यहाँ तक कि भारतीय नागरिक के विरोध में महन्थों ने जिल्ला प्रशासन कार्यालय में मुकदमा भी दर्ज कराया है । मन्दिर प्राङ्गण में एक फ्लेक्स बोर्ड लगा है जिसमे लिखा है ‘जानकी मन्दिर बचाओ हस्ताक्षर अभियान’ । आखिर दोनो महन्थ के बीच क्या राज है – यह आम जनता नही समझ रही है ।
भारतीय नागरिकता प्रकरण, जमीन बिक्री नयी घटना नही है, फिर इतने दिनों से यही साधु सन्त चुप क्यों रहे – नागरिक समाज, युवा क्लव कहाँ गुम थे – रामतपेश्वर दास के प्रेस कान्प|mेन्स से स्पष्ट होता है कि यह सभी कार्य बैकंुठ दास ने किया है । उन्होने गुठी संस्थान को अपने अधीन में लेकर यह फैसला कराया है । इधर इस विवाद से जनता में एक और जिज्ञासा जग रही है कि मठ मन्दिर के महन्थ धर्मकर्म से ज्यादा राजनीति में लगे हुए हैं । इस लिए ‘जानकी मन्दिर का ट्रस्टीकरण’ होना चाहिए । जिससे धार्मिक क्षेत्र का विकास होगा । जितना बडाÞ बबाल महन्थ नियुक्त प्रकरण को लेकर हुआ है अगर यही बबाल धार्मिक विकास के लिए हुआ होता तो आज किसी ने यह परम्परा तोडÞने की कोशिश नहीं की होती ।
धार्मिक एवं ऐतिहासिक यहाँ पर सैकडÞों तालाब हंै, मठ मन्दिर हंै, पर्यटकीय स्थल हैं, किन्तु कभी किसी ने इसका कैसे संरक्षण सर्म्बर्द्धन किया जाय इस मुद्दे पर आवाज नही उर्ठाई है । मन्दिर की सबसे बडÞी परम्परा रही है कि मन्दिर के सामने किसी भी ऊँचे भवन का निर्माण नही किया जाए, पर इस सवाल पर भी साधु सन्त, महन्थ, नागरिक समाज चुप रहे । प्रत्येक महीने में यहाँ पर धार्मिक मेला लगता है इसका व्यवस्थापन और ज्यादा से ज्यादा कैसे तर्ीथयात्रीगणको लाया जाए इसकी किसी को चिन्ता नही है । मन्दिर के भीतर जुता, चप्पल ही नही मलमूत्र भी किया जाता है, किन्तु सभी की आँखें बन्द हैं, कहीं से कोई आवाज नही आती है, आखिर क्यो -
आज जिस प्रकार से महन्थ नियुक्ति प्रकरण की आवाज साधुसन्त, महन्थ, राजनीतिक दल, नागरिक समाज, बुद्धिजीवी, व्यापारी वर्ग ने उर्ठाई है, पर्ूव के क्रियाकलाप में भी अगर ऐसी आवाज उठी होती तो जो कुछ शंका उपशंका आज आम लोगों के भीतर है वह नही होती । जनकपुर के धार्मिक दृष्टि से विकास के लिए जानकी मन्दिर का ट्रस्टीकरण आवश्यक है । सदियों से चलती आ रही परम्परा को ऐसे अचानक खत्म करने का निर्ण्र्ाानहीं लेना चाहिए, हाँ अगर सुधार की आवश्यकता थी तो पर्ूव जानकारी तो सामान्य जनता को होनी ही चाहिए । ‘जानकी मन्दिर बचाओ हस्ताक्षर अभियान’ बोर्ड क्या सन्देश देता है, यह तो नही मालूम, परन्तु इतना जरूर हैं कि जानकी मन्दिर बचाना है तो ट्रस्टीकरण कर दिया जाय जो यहाँ की आम जनता भी चाहती है ।
गुठी द्वारा अनियमितता का आरोप
गुठी संस्थान केन्दी्रय कार्यालय काठमाण्डू ने जानकी मन्दिर के महन्थ रामतपेश्वर पर अनियमितता का आरोप लगाया है । सञ्चालन समिति के माघ १७ गते सम्पन्न हुए बैठक में लिए गए निर्ण्र्ाासे प्रकाशित विज्ञप्ति में लिखा है कि ‘महन्थ राम तपेश्वर दास ने अभी तक अपनी मनमानी से घर निर्माण कर भाडÞ परे लगाने का काम किया है । उतना ही नही जबसे मन्दिर के महन्थ रामतपेश्वर हुए हंै, किसी भी हिसाब -किताब से संस्थान को अवगत नहीं कराया गया है ।’
विज्ञप्ति में यह भी लिखा गया था कि पाँच वर्षके लिए उन्हें जानकी मन्दिर के महन्थ पद पर नियुक्त किया गया था । उसकी समयावधि खत्म हो चुकी है इसलिए उनके स्थान पर जगदीश दास वैष्णव को नियुक्त किया गया है । परन्तु अदालत ने स्पष्ट मिति और समयावधि उल्लेख नही होने के कारण स्पष्टीकरण पूछ कर पत्र को रद्द कर दिया था ।
महन्थ ने कहा ‘चाभी लौटा दो’
परम्परा को तोडÞने वाले किसी भी व्यक्ति पर कार्रवाई आवश्यक है । जानकी मन्दिर महन्थ नियुक्ति धार्मिक परम्परा के विरोध में किया गया है, जिसका साधु सन्त, महन्थ, नागरिक समाज, कुछ राजनीतिक दल, युवाओं ने खुलकर विरोध किया ।
मैं एक बात और स्मरणीय कराना चाहता हूँ, राजतन्त्र के विरोध में धनुषा के सुपुत्र युवा दर्ूगानन्द झा ने राजा महेन्द्र पर बम फेका था जिन्हे फाँसी दी गयी । राजतन्त्र के अन्त के बाद जब पर्ूव राजा ज्ञानेन्द्र जनकपुर के तिरहुतिया गाछी के आम सभा में सहभागी हुए तो जानकी मन्दिर के महन्थ रामतपेश्वर दास ने कहा ‘राजा ने जनता को गाडÞी दी थी चलाने के लिए, जब जनता गाडÞी नही चला सकी तो उन्हे गाडÞी की चाभी लौटा देनी चाहिए ।’
उनका स्पष्ट कहना था कि नेपाली जनता गणतन्त्र नही चला सकी । फिर से राजा को राजतन्त्र  लौटा दें । जब गैर राजनीतिक दल की सरकार से खिलराज रेग्मी जनकपुर जानकी मन्दिर दर्शन के लिए आए तो उन्होंने ज्ञापन-पत्र सहित विनती चढÞाते हुए कहा ‘सरकार पैसा के खेल में जानकी मन्दिर के सदियों की परम्परा को तोडÞने का प्रयास कर रही है । इसका किसी प्रकार निराकरण करें ।’महन्थ की यह राजनीतिक परम्परा कौन सा सन्देश देती है और जनता से क्या उम्मीद रखती है यह तो जनता ही जाने । इससे भी बहुत बडी चुनौती राजनीतिक दलों को है कि अगर गणतन्त्र नही चाहते हंै तो महन्थ का साथ दंे ।व्
जानकी मन्दिर ट्रस्टीकरण हो
जानकी मन्दिर जनकपुर ही नही अपितु नेपाल की भी पहचान है । धार्मिक दृष्टि से जनकपुर के विकास के लिए ‘जानकी मन्दिर ट्रस्टीकरण’ आवश्यक है । किसी भी मन्दिर के महन्थ का राजनीति से कोई ताल्लुक नही होना चाहिए । मठ मन्दिर सभी के लिए बराबर  है । जानकी मन्दिर महन्थ नियुक्ति प्रकरण बहुत दुःख की बात है ।
रत्नसागर मठ के महन्थ और जानकी मन्दिर के महन्थ के बीच का अर्न्तर्द्वन्द से बाहर गलत सन्देश जाता है । जनकपुर धार्मिक पर्यटकीय स्थल है और यहाँ पर दूर दराज से तर्ीथयात्रीगण आते हैं, जिनपर इन सब बातों का अच्छा प्रभाव नहीं पडÞेगा । सुप्रिम कोर्ट ने जो आदेश जारी की है उसे सभी को मानना होगा । गलत करने वाले को सजा देने के लिए न्यायालय है । मठ मन्दिर का राजनीतिकरण कभी नही होना चाहिए । महन्थ का काम होता है धर्म प्रचार में लगना न कि नारा जुलुस और तोडÞफोडÞ करना ।

Sunday, March 16, 2014

महामूर्खहरुसँग

जनकपुरको जानकी मन्दिरमा मिथिला नाट्यकला परिषद् द्वारा आयोजित महामूर्ख सम्मेलनमा महामुर्ख डा. विजय कुमार, प्रोफेसर विजय दत्त, नेपाल पत्रकार महासंघका नि.वर्तमान अध्यक्ष रामअशिष यादवसँग कैलास दास र अन्य महान व्यक्तित्वहरु ।







Monday, February 10, 2014

‘विवाद में जनकपुर का विकास’

कैलास दास

एक तरफ जनकपुर धार्मिक स्थलो को लेकर प्रसिद्ध है तो दुसरी ओर यहाँ का सडके, नाला और जीर्ण मन्दिरों को लेकर बदनाम भी । जहाँ तक विकास की बात है तो नेपाल सरकार से ज्यादा दातृ राष्ट्र में उत्सुकता अधिक देखा गया है, चाहे  भारत सरकार, थाइल्याण्ड सरकार वा एशियाली विकास बैंक क्यो न हो । अगर इन सबो को सहयोग को मात्र सही सदुपयोग किया गया होता तो जनकपुर अभी नेपाल के प्रथम पर्यटकीय स्थल माना जाता । परन्तु स्थानीय कुछ विवादो के कारण जिस प्रकार से विकास होनी चाहिए वह नही हुआ है ।
जनकपुर विशुद्ध रुप से धार्मिक पर्यटकीय स्थल हो इसके लिए स्थानीय स्तर से जिस प्रकार के प्रयास होना चाहिए अभी तक किसी ने नही किया है । हा, एक बात तो आवश्य है कि इसके विकास के लिए जो भी बजट आता है उस पर नेताओं को गिद्ध दृष्टि जरुर लगी रहती है । यही कारण है कि जनकपुर के विकास से ज्यादा व्यक्ति को विकास देखा गया है । कुछ दिन पहले जिला विकास समिति के १८ कर्मचारीयों को निलम्बन किया गया है । उनके उपर भ्रष्टाचार के आरोप लगी है । जनकपुर नगरपालिका में भी वही हाल है । कहने का मतलव है जनकपुर धार्मिक स्थल को लेकर प्रसिद्ध होना चाहिए न की भ्रष्टाचार और गन्दगी के नाम से ।
भारत के हरियाणा, पञ्चाब, राजस्थान, दिल्ली, लखनाउ, झारखण्ड,मद्रास, कलकत्ता सहित दर्जनौं प्रान्त से जानकी दर्शन के लिए यात्रीगण जनकपुर आते है जिनमे अधिकांंश के पाँव में जुते वा चप्पल नही देखने को मिलेगा । सडको पर कंकड पत्थर के वाजुद भी नङ्गे पाँव चलते है । गन्दगी से भरी तलाव में स्नान कर माता जानकी के दर्शन करने जाते है । और जाते वक्त यहाँ के मिट्टी को अपने साथ ले जाते है । वही यहाँ के लोगों में उसके विपरित देखा गया है । यह बात सम्झना होगा कि हम जिस जगह रह रहे है उसका कितना महत्व है । इसी महत्व को समझकर जनकपुर के विकास के लिए थोड़ा प्रयास स्थानीय स्तर से और नेपाल सरकार की ओर हुआ होता तो जनकपुर आज विश्व सम्पदा सूची में होता । धार्मिक दृष्टि से यहाँ के विकास हो उसके लिए नेपाल सरकार से ज्यादा दातृ राष्ट्र सहयोग करने के लिए तत्पर है । परन्तु यहाँ के राजनीतिक उलझन के चलते कोई भी राष्ट्र आगे आने से कतराती है ।
वैसे कहा जाए तो पर्यटको को रोकने के लिए जनकपुर प्रत्येक दृष्टि से सम्पन्न है । कहते है बावन कुट्टी बहत्तर कुण्ड साधु चले झुण्ड ही झुण्ड । अर्थात यहाँ जितनी मठ मन्दिर है उतने ही यहाँ पर तलाव भी जिसका अपना महत्व है । उसे संरक्षण के लिए दातृ राष्ट्र प्रतिबद्ध है परन्तु करने वाले निकाय बहुत ही तुच्छ और भ्रष्ट विचार को देखा गया है ।
भारत सरकार ने यहाँ के सौन्दर्यीता को विकास में सबसे ज्यादा ध्यान दी है । कुछ दिन पहिले मठ मन्दिर, पोखरी एवं पर्यटकीय स्थल को विकास के लिए वृहत्तर जनकपुर क्षेत्र विकास परिषद् को तीन करोड रुपयाँ दिया था । उससे रंगभूमि मैदान (बाह्र विघा), गंगा सागर एवं धनुष सागर पोखरी के सौन्दर्यीकरण के साथ छोटे छोटे मठ मन्दिर में खर्च का विवरण वृहत्तर ने प्रस्तुत किया है । लेकिन एक भी काज पुरा नही हुआ है । जब वीगरञ्ज स्थित महावाणिज्यदूत का भारतीय कन्सिलर अञ्जु रञ्जन ने विकास को अवलोकन करने आया तो उसने सन्तुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि जनकपुर और अध्योया बीच बहुत ही गहरा सम्बन्ध है, इसलिए जनकपुर के विकास प्रति भारत प्रतिबद्ध है । किन्त् भारत सरकार ने जिस काम के लिए बजट दिया था वह काम सन्तुष्टि योग्य नही हुआ है । उन्होने यह भी कहा कि भारत अच्छे काम के लिए लगानी करना चाहता है जिससे दोनो मुल्क बीच ऐतिहासिक सम्बन्ध बना रहे । लेकिन काम मेंं इन्दारिता को कमी देखा गया, उन्होने स्पष्ट रुप से एक कार्यक्रम में बोली है । उनके मुख से निकला यह शब्द वास्तव में स्थानीयवासीयो के लिए लज्जास्पद है । नेपाल सरकार कभी जनकपुर के सौन्दर्यीता पर ध्यान तो दिया ही नही और पडोसी राष्ट्र के सहयोग राशी में भी भ्रष्टाचार आरोप कितनी बइज्जतीवाली बात है ।
उसी प्रकार नेपाल के सबसे बडी यतायात साधन के रुप में नेपाल रेल्वे है जो अभी घुटघुट कर चल रही है । उसे भी ब्रोडगेज करने के लिए भारत सरकार ने ८ अर्ब रुपया सहयोग करने का प्रतिबद्धता जनाया है । उसमे से एक अर्ब रुपैया दे भी चुका है । परन्तु जिस प्रकार से काम प्रारम्भ होनी चाहिए अभी तक नही हुआ है । जग्गा मुआब्जा, रेल्वे स्टेशन की जग्गा उपलब्ध में राजनीतिकरण सहित बहुत सारे ऐसा विवाद है जिसके कारण दो वर्ष मे तैयार होने वाला ब्रोडगेज रेल और कितना दिन लगेगा बताना मुश्किल है । मुझे खुशी है कि परोसी राष्ट्र इस स्थल को विकास देखना चाहता है परन्तु दुःख है कि यहाँ का सम्बन्धित निकाय उसे भी अपना घोटाला के रास्ते सम्झते है ।

जनकपुर विकास के लिए १ अर्ब ८२ करोड अनुदान
इस बार जनकपुर दुल्हिन की तरह सजेगी ऐसा चर्चा आम लोगों में व्याप्त है । एशियाली विकास बैंक नें जनकपुर विकास के लिए १ अर्ब ८२ करोड रुपैया दिया है । जिनमे सडके, नाला, पोखरी तथा ऐतिहासिक स्थलकों विकास किया जाऐगा ।